कोहरे की धुंध में हम तुझे तकते रहे
घोर ठिठुरन गलन में तनहाइयां लिखते रहे
पहले देखा घूरकर फिर पलटकर देखा नहीं
बदनामियां मिलती रहीं हम आस में जीते रहे
ठंड से हम कांपकर तुझपे निछावर हो रहे
तू अकड़ से जा रही हम तेरी खातिर मर रहे
बस तेरी तस्वीर इस दिल से चिपककर रह गई
तू है कांटों की बनी जो उम्रभर चुभती रहे
मैने तेरे हर कदम पर अपने दामन को रखा
तू कुचल देती रही हम दर्द ही सहते रहे
था नहीं कोई इरादा और आई भी नहीं
हम तेरी यादों के बंगले में अंकेले ही रहे
आंधियां न बिजलियां न बारिशें आई कभी
दिन रात सारी जिंदगी हम रिमझिमों को तक रहे
इश्क के उस दौर में हम फैलकर चैड़े रहे
तुमने कुछ बख्शा नहीं हम दौरे मुंगेरी रहे
हम जिंदगी व जिगर में सिगरेट सुलगाते रहे
चाहा तुझको जिस जिगर में उसको सुलगाते रहे
घोर ठिठुरन गलन में तनहाइयां लिखते रहे
पहले देखा घूरकर फिर पलटकर देखा नहीं
बदनामियां मिलती रहीं हम आस में जीते रहे
ठंड से हम कांपकर तुझपे निछावर हो रहे
तू अकड़ से जा रही हम तेरी खातिर मर रहे
बस तेरी तस्वीर इस दिल से चिपककर रह गई
तू है कांटों की बनी जो उम्रभर चुभती रहे
मैने तेरे हर कदम पर अपने दामन को रखा
तू कुचल देती रही हम दर्द ही सहते रहे
था नहीं कोई इरादा और आई भी नहीं
हम तेरी यादों के बंगले में अंकेले ही रहे
आंधियां न बिजलियां न बारिशें आई कभी
दिन रात सारी जिंदगी हम रिमझिमों को तक रहे
इश्क के उस दौर में हम फैलकर चैड़े रहे
तुमने कुछ बख्शा नहीं हम दौरे मुंगेरी रहे
हम जिंदगी व जिगर में सिगरेट सुलगाते रहे
चाहा तुझको जिस जिगर में उसको सुलगाते रहे
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