Tuesday, April 25, 2017

तुम खुश तो होगे

तुम खुश तो होगे...
तुम्हारी रोटियां पक तो जाएंगी
सेना की चिताओं की गर्मी से
तुम खुश तो हुए होंगे।

उनके बिखरे परिवार को रोते देख कर
वह रोते रहे हैं और रोते रहेंगे
तुम्हारे चेहरे का बिम्ब खिला तो होगा
शायद गिद्ध की भांति जो मुर्दो को खाकर
अपना पेट भरता है।
 
शायद तुम भी वही गिद्ध हो
जो जा रहे सेनाओं पर टूट पड़े
तुम्हारे खोखले विचारधारा का सार
बंदूक की नली है जो बेसहारों से लेकर
देश की रक्षा में लगे जवान तक को खा जाती है।

तुम खुश तो होंगे उनके परिवार के विलाप पर
यह देश उस सेना की मां बहुत कुछ झेल सकती है
क्योंकि वह बर्दाश्त करती है यहां के आंतरिक आतंकवाद को 

Monday, April 10, 2017

अपने दिल की हाल बताना मुश्किल है

इश्क का इरादा बदल जाना मुश्किल है
तुम्हें पाना भी मुश्किल है तुम्हें खोना भी मुश्किल
जरा-जरा यादों पर आंखें भिगो कर बैठ जाता हूं
तुम्हें तो अपने दिल की हाल बताना भी मुश्किल है..

जानता हूं तुम्हारी आंखों की प्यास गहरी है
पर मेरे आंखों की नदी भी कभी कहां सुखते
तुम पत्थर हो पत्थर की आंख कहां पिघलती
पथराये शरीर के भीतर आंसू कहां पनपते....

जमीन और आसमां नहीं मिलते कभी
बस मिलते हुए प्रतित होते है....
तुम्हे पाने की भगवान से कभी प्रार्थना नहीं की
और क्यूं करु तुम तो खुबशूरत गुलाब हो
जिसकी सुन्दर पंखुड़ियां कल कहीं जमी
पर बिखरी होंगी जो खुद एक दार्शिन होगा
मैं उसे क्यों मांगू जिसको सब चाहते है।