इश्क का इरादा बदल जाना मुश्किल है
तुम्हें पाना भी मुश्किल है तुम्हें खोना भी मुश्किल
जरा-जरा यादों पर आंखें भिगो कर बैठ जाता हूं
तुम्हें तो अपने दिल की हाल बताना भी मुश्किल है..
जानता हूं तुम्हारी आंखों की प्यास गहरी है
पर मेरे आंखों की नदी भी कभी कहां सुखते
तुम पत्थर हो पत्थर की आंख कहां पिघलती
पथराये शरीर के भीतर आंसू कहां पनपते....
जमीन और आसमां नहीं मिलते कभी
बस मिलते हुए प्रतित होते है....
तुम्हे पाने की भगवान से कभी प्रार्थना नहीं की
और क्यूं करु तुम तो खुबशूरत गुलाब हो
जिसकी सुन्दर पंखुड़ियां कल कहीं जमी
पर बिखरी होंगी जो खुद एक दार्शिन होगा
मैं उसे क्यों मांगू जिसको सब चाहते है।
तुम्हें पाना भी मुश्किल है तुम्हें खोना भी मुश्किल
जरा-जरा यादों पर आंखें भिगो कर बैठ जाता हूं
तुम्हें तो अपने दिल की हाल बताना भी मुश्किल है..
जानता हूं तुम्हारी आंखों की प्यास गहरी है
पर मेरे आंखों की नदी भी कभी कहां सुखते
तुम पत्थर हो पत्थर की आंख कहां पिघलती
पथराये शरीर के भीतर आंसू कहां पनपते....
जमीन और आसमां नहीं मिलते कभी
बस मिलते हुए प्रतित होते है....
तुम्हे पाने की भगवान से कभी प्रार्थना नहीं की
और क्यूं करु तुम तो खुबशूरत गुलाब हो
जिसकी सुन्दर पंखुड़ियां कल कहीं जमी
पर बिखरी होंगी जो खुद एक दार्शिन होगा
मैं उसे क्यों मांगू जिसको सब चाहते है।
No comments:
Post a Comment