Saturday, March 11, 2017

मेरे रास्तों में तेरा घर है की नहीं

मेरे घर को ख्वाबों से सजाने वाली
तेरे ख्वाबों के घर में मेरी जगह है की नहीं...
अपनी जहन से पूछ कर बता देना मुझको
मेरे रास्तों की मुकद्दर में तेरा घर है की नहीं....

तन की सरहदों के दायरे में एक ख्वाब बसाया है
दिल के झरोखे में तुझको बिठाया है.....
तू बता दे मेरे रास्तों में तेरा घर है की नहीं
बस तू बता दे करवट बदल लूगां तेरी राहों से
कहीं और निकल लूंगा...

उसे उदास ख़्वाब-सा दरकिनार कर दूंगा..
उसके बाद हकीकत सा निखर जाऊंगा...
प्यार पर बस तो नहीं है मेरा, लेकिन फिर भी
तू बता दे की तुझे प्यार करू या नहीं....