सुने है मैंने बहुत सुख और दुःख के गीत
चलो आज मिलकर सुनते है खामोशी भरी संगीत
जिसमें न है कोई सूर और न ही कोई गीत
फिर भी वह है अपने दिल के बहुत करीब।
सुने हैं मैने बहुत सुख और दुःख के गीत
महसूस की है मैंने वह रागनी की संगीत
जिसमें तुम हुआ करती थी कभी मेरे करीब
सूना है मैंने वह खूशियों भरी गीत।
महसूस की है मैंने वह सूख और दुःख की संगीत
जहां बजती है कभी दिल की गीत
तो कभी होती है खामोशियों हमारी मीत
तब सैलाब सा होता है मन के अंदर
सामने बिखर आते है आंसू के समंदर
तब जीत कर भी ज़िन्दग़ी में मिलती नहीं जीत।
मैंने सुने है बहुत सुख और दुःख के गीत।