फर्क यही तुम्हारे और मेरे लेखन में है
तुम जादूगर शब्दों की हो
मैं लिखता जज्बात हूं।
तुम शब्दों को मोड देती हो
मैं जज्बातों को खोल देता हूं।
तुम देखती हो हसीन सपने
मैं अपने पुराने दबे ज़ख्म देखता हूं
तुम जब भी दिखाती हो कोई रंगीन ख्वाब
मैं अक्सर अपने नींद से जग जाता हूं।
तुमने सीखा हसीन ख़्वाब को जीना
मैंने सीखा जिन्दगी को गले लगाना
तुमने पढ़ा किताबों के पन्ने
मैंने तर्जुबे से सबक लिया।
फर्क यही है तुम्हारे और मेरे लेखन में
तुमने लिखे मोहब्बत के नगमें
मैं लिखता जीवन का कश्मकस हूं।
तुम करती जिसका आगाज हो
मैं उस सफऱ का अंजाम हूं।
तुम बिखेरती फरेबी मुस्कान हो
मैंने तो ताउम्र दर्द को पाला है
तुम गिनती लहरों को हो
मैंने लहरों को गले लगाया है।
फर्क यही है तुम्हारे और मेरे लेखन में
तुम जादूगर शब्दों की हो
मैं लिखता जज्बात को।