मैं तुम्हें फिर मिलूंगा
कब, कहां, कैसे मुझे नहीं पता...
पर मैं तुम्हें मिलूंगा शायद तुम्हारी यादों में
तुम्हारी सांसों में या फिर
तुम्हारे लहु के हर करते में...
मैं तुम्हे मिलूंगा तुम्हारे हर रंजो-गम
तुम्हारी खूशियों में तुम्हारे गम में
तुम्हारे लहु में एक कतरा भी तो ऐसा नहीं
जिसमें मैं नहीं हर जगह मैं मिलूंगा...
मैं मिलूंगा तुम्हारे हर एक धड़कन में
हवा के जोके में बारिश के बुंदों में
धरती से लेकर गगन में.....
मैं मिलुगा शायद तुम्हें अगले जन्म में...
कब, कहां, कैसे मुझे नहीं पता...
पर मैं तुम्हें मिलूंगा शायद तुम्हारी यादों में
तुम्हारी सांसों में या फिर
तुम्हारे लहु के हर करते में...
मैं तुम्हे मिलूंगा तुम्हारे हर रंजो-गम
तुम्हारी खूशियों में तुम्हारे गम में
तुम्हारे लहु में एक कतरा भी तो ऐसा नहीं
जिसमें मैं नहीं हर जगह मैं मिलूंगा...
मैं मिलूंगा तुम्हारे हर एक धड़कन में
हवा के जोके में बारिश के बुंदों में
धरती से लेकर गगन में.....
मैं मिलुगा शायद तुम्हें अगले जन्म में...