धुंध के साए जब से पड़े शहर में
लोग घबराए पहली दफा अपने घर में
कौन जाने किसकी मौत
कब आ जाये यह हालात है, अब शहर में
बेहया प्रदूषण से सारे विश्व में
आंखें शरमाये अपने शहर के
खंजरो और चाकुओं से भी ज्यादा
जिस्म थर्राया हवा में फेले जहर से...
सांसों में दिक्त और जलन आखों में
लाख जतन कर लो, अब जी नहीं
पाओंगे इस शहर में, अब भी कुछ
उम्मीद है बाकी थोड़ा तो शर्म कर
शहर को बचाने को थोड़ा प्रदूषण कम कर।
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