कैसी अजीब बिडम्बना है...
बच्चो का बचपन अभिशाप बना दिया..
जो अज्ञात हैं जीवन के मूल्यों से ..
उन्हें बांध दिया गया रिश्तो की जंजीरो में ..
अच्छा बुरा मालूम नहीं...
अपना पराया मालूम नहीं ...
फूल जैसे हाथों से खेल खिलोने छीन लिए...
खिलोने पकड़ने की उम्र में शादी के रिश्तों से बंध गई..
थमा दिया हाथ किसी का और के हाथ में
किसी पिंजरे में डाल दिया ...
बोझ न समहज कर इन्हें यूँ न बांधो...
किसी रिश्ते के चंगुल में...
बच्चो का बचपन अभिशाप बना दिया..
जो अज्ञात हैं जीवन के मूल्यों से ..
उन्हें बांध दिया गया रिश्तो की जंजीरो में ..
अच्छा बुरा मालूम नहीं...
अपना पराया मालूम नहीं ...
फूल जैसे हाथों से खेल खिलोने छीन लिए...
खिलोने पकड़ने की उम्र में शादी के रिश्तों से बंध गई..
थमा दिया हाथ किसी का और के हाथ में
किसी पिंजरे में डाल दिया ...
बोझ न समहज कर इन्हें यूँ न बांधो...
किसी रिश्ते के चंगुल में...
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