Thursday, December 17, 2015

जिंदगी ना जाने तू मुझसे

जिंदगी ना जाने तू मुझसे क्या चाहते हो
किस मोड पर लाकर मु़झे छोड़ देते हो
मेरे ख्वाबों, मेरी तम्मनोओं को कहीं
पीछे छोड़ ना जाने किस ओर चले जा रहे हो...

मेरे हर कोशिश को नाकाम किए जा रहे हो
मुझसे ना जाने कौन सी दुश्मनी है
जिसे तुम हर पल निभाए जा रहे हो
मुझे अंधेरों में धकेल के किसी ओर के हुए जा रहे हो...


जिंदगी ना जाने तुम मुझसे क्या चाहते हो
पर मैं खुद को तेरे ही धारा में छोड़ कर
बिना कुछ सोचे समझे बड़े जा रहा हूं
तेरे रंग में ही रंगे जा रहा हूं...

पर तुम दुश्मनी निभाए जा रहे हो
मेरे हर कोशिश को धुंए में उड़ाए जा रहे हो
पर मैं एक दिन इस धुंए को मोड़ लाउंगा
तेरे दुश्मनी से कही आगें निकल जाउंगा
तब तुम पश्चताओंगे और दुश्मनी
छोड़ दोस्ती का हाथ बढ़ओंगें...
                                                                                                                                                             


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