Friday, December 18, 2015

खोजने हैं पुराने वो कुछ सपने

खोजने हैं पुराने वो सपने
जो कभी छोटे-छोटे होथों ने
बड़ी-बड़ी आंखों से देखे थे
अपनी जान से भी बड़ी कल्पना की थी...

वो खो गए है अभी कहीं उसके साथ
कुछ विश्वास जो कभी होते थे अपने पास
ना जाने क्यों कर रहा है वह मुझसे विश्वासघात
खोजने हैं पुराने वो कुछ सपने...

जिसमें बसते थे विश्वास अपने
अब उन विश्वासों को खोज रहा हूं
खुद को छोड़ सपनों को जोड़ रहा हूं
मुझे उस सपनों को पाना है...

जो कभी देखे थे छोटे-छोटे हाथों ने
बड़े-बड़े आंखों ने उन सपनों को पाना है
फिर से वहीं विश्वीस अपने अंदर जगाना है...

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