Friday, November 20, 2015

वक्त कितना कुछ सिखा देता है

वक्त कितना कुछ सिखा देता है
एक मासूम को जवां बना देता है
खेलना कुदना छोड़ कर कामों में फसा देता है
वक्त कितना कुछ सिखा देता है...

जिंदगी को नया बना देता है
दुनिया की हकीकत से रू-ब-रू करा देता है
सब कुछ झोड़ किसी और में रमा देता है
वक्त हमें कितना कुछ सिखा देता है...

अजीब कश्मकस है जिंदगी में यारो
कुछ पाने की चाह में जिंदगी बिता देते है
वक्त एक पल में उसे मीटा देता है
इस वक्त के आगे सब लाचार है...

दुनिया में सब इसके आगे बेकार है
अब सोचता हूं क्या मिला जिंदगी में
धोखा-ठोकर के अलावे, शायद यही वक्त
की मार है इसके आगे सब लाचार है
वक्त कितना कुछ सिखा देता है...


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