Wednesday, July 22, 2015

सोचता था कुछ ऐसा कर जाऊंगा

सोचता था एक दिन कुछ ऐसा कर जाऊंगा
दुनियां में अपना परचम लहराऊंगा।
इसी ख्याल में जीता रहा जिंदगी का 
जहर पीता रहा ।

पर अब ऐसा लगता है गलत फहमी जीता रहा 
क्यों घूट-घूट कर जहर पीता रहा ।
क्यों जिंंदगी को लुटाता रहा। 
बचपन से सुना आ रहा था ..

कुछपाने के लिए कुछ खोना पड़ता है
जिंदगी में जहर भी पीना पड़ता है...
पर अब समझ में आया है...
ये दुनिया बड़ा जालिम है ...
लूट के खाने का यहां सबके पास तालिम है...

No comments:

Post a Comment