Monday, May 22, 2017

बारिश होगी


काला घोर बादल आया है
संग अपने बरखा लाया है
सारी धरती चहक उठी है
पर तुम नहीं आई
मैं चुपचाप देखता रहा बारिश की
गीरती बूंदों को, बूंदों की सरगोशी को

उससे उठती संगीत को, मैं अकेला
सूनता रहा, तुम नहीं थी मैं तनहा
तुम्हें खोजता रहा।
मिट्टी की सोंधी खुशबू महक रही है।
उस खुशबू में तुम्हें महसूस कर पा रहा हूं।

हर दफा यही होता है जब-जब बारिश होती है
मैं अकेला होता हूं उसकी गिरती बूंदों से लेकर मिट्टी
की उड़ती सोंधी खुशबू को मैं अकेले महसूस करता हूं।

तुम एक बार भी साथ नहीं रही हो, पूरे बरसात में
सरक जाता है बादल चांद अचानक मुस्काता है।
उस पल हमदम तेरा चेहरा बादलो के बीच
उस चांद में नजर आता है।

पर तुम नहीं होती हो पूरे बरसात में
मैं अकेला भिंगता हूं तुम्हें खोजता हूं
तुम्हारे चेहरे को बादलों के बीच उस चांद में देखता हूं।
तुम नहीं मिलोगी यह मैं जानता हूं।

इस बार बारिश आयेंगी मैं अकेले भींगूगा
तुम्हें भूल कर खुद में खो जाऊंगा।
मिट्टी की सोंधी खुशबू में, तुम्हें नहीं खुद को पाऊंगा।




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