हम साथ ना रहकर भी साथ चलेंगे
तुम वहां तन्हाइयों में रहना
मैं यहां यूं ही भटकूंगा रहूंगा
देना तुम मुझे हर बात पर आवाज
मैं यहां तुम्हारे शब्द को महसूस करुगां
दूरियों से हम कभी न परेशां होंगे।
कभी एक दूसरे को नहीं भूलायेंगे
चाहे बदल जाये जामाना हम यू रिश्ता निभायेंगे
हम जमीन पर थे, जमीन पर सपने सजाया करेंगे।
लोगों की ज़िद होगी हमे जुदा करने की
पर तुम यू ही साथ निभाते रहना।
हम शायद ही कभी मिल सके
पर हम यादों में जिया करेंगे
सफ़र अपना मुकम्मल हो
यही खुदा से दुआं करेंगे
कभी खुद न तुमको रूसवां करेंगे।
इन दिवारों पर हम यादों को भरेंगे।
हम सजा अपने आप के बेशुमार देंगे
हम खुद को एक दूसरे में रखकर
यू ही जिन्दा रहेंगे।
नाउम्मिदों से न हारे है, न हारेंगे
हम यूं ही मोहब्बत को जिंदा करेंगे।
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